होली है


 होली है

होली है, होली है, 
होली है भाई होली है,
बुरा न मानो होली है, 
पर यह कैसी होली है?

रंग रंग के गुलाल उड़ाते, 
रंग रंग में रंगते पड़ोसी,
पर यह कैसी होली आई, 
खून की होली, खेलते पड़ोसी। 

गूँज रही दुनिया तोप, और धमाकों से, 
 खून ही खून है बिखरा हर तरफ, 
जिद, अहंकार, घृणा, के बादल, 
ओस नहीं, इन्ही का कोहरा हर तरफ। 

आओ मिल कर प्रार्थना करें, 
मंदिर, मस्जिद, गिरजे, गुरूद्वारे,
मिलकर सभी इबादत करें, 
खून नहीं, प्रेम-प्यार विश्वास कारण बने। 

होली में कुछ परिवर्तन करे, 
व्यवहार में विश्वास का रंग भरे,
संबंधों में कुछ मधुरता भरे,
घृणा कुंठा के विष चक्र को तोड़े, 
होली मनाये, होली मनाये, 
शुभ्र, सरल, मनोरम, परिवार बनाये। 


अनुप मुख़र्जी "सागर"
होली, २०२६ 

1 comment: