आँख का मोती

आँख का मोती 

आंखों से जो छलकते मोती,
नहीं उनको कीमत मिलती।

आंखे ना बन जाए 
झुलसाता आफताब,
आ जाने दो उनसे सैलाब।

कहीं उसी से नजरिया बदले,
दुनिया वाजिब इज्जत तो दे ।

बहने दो सैलाब का पानी,
समुद्र के नमक से मिले आखिर
आंखों का ये नमकीन पानी।

वहीं चलकर बनते है मोती
सागर की गहराई ने देखो
सहेजे, सोते वहां कितने मोती।

अनुप मुखर्जी "सागर"

2 comments:

  1. क्या बात है। मुझे गर्व है तुम पर।

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