चाय बनाम कॉफी
दोनो देते ताजगी
सुबह हो या शाम
नींद थकान भगाते
दोनों करते यह काम।
दूध साथ पियो इनको
डालो चीनी मलाई,
कभी डालो घी, या फिर
डालो अमूल मक्खन।
नही पसंद ये सब, या
फिर डरते मधुमेह, मोटापा,
लो तुम चाय कॉफी शुद्ध,
बिना दूध, शक्कर, मलाई।
पीते रहो, पिलाते रहो,
बस ध्यान रखो एक,
हो जाय न तुमको,
नशा! तो दो इसको फेंक।
नशा, खतरा है नशे से,
चाहे हो चाय कॉफी, भांग,
नशा से नुकसान हमेशा,
चाहे शराब हो या शबाब।
नशा चाहे हो दादागिरी का,
ज्ञान का, या फिर ताकत का।
धर्म का, या राजनीति का,
त्याग करो भाई नशे का।
मजा लो मेरे साथ,
शुद्ध-साफ कप या ग्लास में,
जो इसमें से जो चाहो, जैसा चाह,
दूध और चीनी, या बिना इनके
मजानले लो, चाय या कॉफी का।
अनूप मुखर्जी "सागर"

Nice poem on tea and coffee. Good collection of words cautioning the persons not to get addicted.
ReplyDeleteNice Change in thr mood of writing, light hearted and educational too. Keep it up
ReplyDelete