मैं कौन, कौन मैं?

  



कौन मैं, मैं कौन?
मैं छात्र, सीखने का नशा,
उसी नशे मे मैं विभोर।
मैं बालक, सहज, सरल, 
जो सिखाते गुरु, सीखता।

मैं कौन? क्या मैं, मैं हूँ?
मैं तो मैं होने के प्रयास में रत,
पर जग क्योंकर विरोधी,
क्योंकर चाहे,  कि खुद, 
मैं ही खुद न बनू।

मैं यौवन, मैं वृद्ध, 
मैं ज्ञानी, मैं अज्ञानी,
मैं शिक्षक, मैं शिक्षार्थी,
मैं गृहस्थ, परिवार के वृत्त में,
मैं सन्यासी, निज अन्तर में।
मैं भिक्षुक, विश्व के द्वार पर,
मैं दाता, किसी दीन के सम्मुख, 
मैं क्रेता, खुद की आवश्यकतानुसार,
विक्रेता, वो भी आवश्यकता पर।

फिर प्रश्न, मैं कौन, कौन में? 
मैं तो केवल मैं, वही रहने दो।
अपने उद्देश्यों में व्यस्त मैं, 
ईश्वर का ही अंश मैं।
मैं जो भी हूँ, वही दृश्य हूँ,
मैं छाया नहीं, छलावा नहीं,
कृत्रिम नहीं, वास्तव हूँ।
सम्भवत अपूर्ण ही सही,
जो हूँ, वही दिखता हूँ।


अनुप मुखर्जी "सागर"

1 comment:

  1. WHO AM I VERY WELL EXPLAINED THAT TOO ON LINE .
    EXCELLENT U R GREAT .

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